Jun 9, 2017 · कविता
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उठ जाओ मेरे लाल

उठ जाओ मेरे लाल,
रवि भी हो गया लाल,
आ गए तेरे सखा बाल,
उठ जाओ मेरे गोपाल….
बजाओ तुम अपने गाल,
सुनाओ तुम अपने बोल,
पूछो अपनी माँ का हाल,
दिखाओ अपनी पद चाल,
उठ जाओ मेरे लाल…..
बुला रहे तुझे नैनिहाल,
हो रहे वे बहुत बेहाल,
पुकार रहे तुझे नदी ताल,
चलेंगे फिर से नैनीताल,
उठ जाओ मेरे लाल…..
तुम्हारे लिए हैं फल लाल,
निशा भी दिखा रही चाल,
तुम हो मेरे बुढ़ापे की ढाल,
बहुत बड़ा हैं संसार जाल,
उठ जाओ मेरे लाल…
सूना रहेगा बहन का थाल,
किसे लगाएगी तिलक भाल,
कौन दिखाएगा हमको मशाल,
यह जीवन बड़ा विशाल,
उठ जाओ मेरे लाल….
।।।जेपीएल।।।

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जगदीश लववंशी
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J P LOVEWANSHI, MA(HISTORY) ,MA (HINDI) & MSC (MATHS) , MA (POLITICAL SCIENCE) "कविता लिखना... View full profile
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