उगता सूरज: कुछ दोहे

उगता सूरज: कुछ दोहे
@ दिनेश एल० “जैहिंद”

ले सबक प्रभाकर से, जीवन-रथ तू हाँक ।
जैसे सूरज गति करे, _ जीवन-पथ तू साध ।।

चलके तू रवि-राह से, रवि जैसा कर काम ।
ठीक रवि समान जग में, _ तेरा होगा नाम ।।

एक सूर्य एक धरती, एकहिं दिखता चाँद ।
संपूर्ण जगत के लिए, __ तीनों हैं नाबाद ।।

सीख उगते दिनकर से, ले ढलते से ग्यान ।
ग्यानी-विज्ञानी यहाँ, __ दिए इसी पे ध्यान ।।

“जैहिंद” करै स्तुति जपै, और “दिनेश”-हुँ नाम ।
जै-जै हे आदित्य मल, _ बनै सकल-जग-काम ।।

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दिनेश एल० “जैहिंद”
08. 11. 2017

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