.
Skip to content

उगता सूरज: कुछ दोहे

दिनेश एल०

दिनेश एल० "जैहिंद"

दोहे

November 12, 2017

उगता सूरज: कुछ दोहे
@ दिनेश एल० “जैहिंद”

ले सबक प्रभाकर से, _जीवन-रथ तू हाँक ।
जैसे सूरज गति करे, जीवन-पथ तू साध ।।

चलके तू रवि-राह से, रवि जैसा कर काम ।
ठीक रवि समान तेरा, जग में होगा नाम ।।

एक सूर्य एक धरती, एकहि दिखता चाँद ।
संपूर्ण जगत के लिए, __ हैं तीनों नाबाद ।।

उगते दिनकर से सीख, _ले ढलते से ग्यान ।
सकल ग्यानी-विज्ञानी, दिए इसी पे ध्यान ।।

“जैहिंद” करै स्तुति अरू, जपै “दिनेश”-हुँ नाम ।
जय-जय आदित्य देवा, _बनै सकल-जग-काम ।।

==============
दिनेश एल० “जैहिंद”
08. 11. 2017

Author
दिनेश एल०
मैं (दिनेश एल० "जैहिंद") ग्राम- जैथर, डाक - मशरक, जिला- छपरा (बिहार) का निवासी हूँ | मेरी शिक्षा-दीक्षा पश्चिम बंगाल में हुई है | विद्यार्थी-जीवन से ही साहित्य में रूचि होने के कारण आगे चलकर साहित्य-लेखन काे अपने जीवन का... Read more
Recommended Posts
≈≈≈ जैहिंद के छ: दोहे ≈≈≈
जैहिंद के छ: दोहे // दिनेश एल० “जैहिंद” राम-किसन दोऊ स्तम्भ, भारत की हैं शान । हमरी कामना तो इहै, इन सदृश हों जवान ।।... Read more
ग़ज़ल : वो मेरा साया है......
ग़ज़ल / दिनेश एल० "जैहिंद" अलग नहीं मुझसे वो मेरा साया है । मैं आधा वो आधा हम इक काया हैं ।। तू बायाँ मैं... Read more
¤¤¤ जैहिंद के दोहे ¤¤¤
जैहिंद के दोहे --- होई मुग्ध जग सारा, देखि सुधर तन-रूप । मुख बिचकाए संसार, मुखड़ा देखि कुरूप ।। देखे सूरत सब कोय, लखे न... Read more
धन तेरस: पाँच दोहे
धन तेरस: पाँच दोहे // दिनेश एल० “जैहिंद” कार्तिक कृष्ण त्रयोदश, धन तेरस कहलाय । हिंदु धरमावलम्बी हो, _प्रसन्न इसे मनाय ।। सोना, रजत अरु... Read more