कविता · Reading time: 1 minute

ईश्वर दे दो यह वरदान ।

ईश्वर दे दो यह वरदान ।
कम मे संतोष सदा ही
असहायो को दे सकूँ योगदान
ईश्वर दे दो यह वरदान ।
कुछ बनना मैं बाद में सोचू
बन जाऊँ पहले इंसान ।
धन पद गौरव कीर्ति रहे सम
जिससे जीवन में सम्मान
ईश्वर दे दो यह वरदान ।
मन मेरा मालिन्य रहित हो
बना रहे सौहार्द महान
अच्छे विचार मन में आए
जीवन भर करू तेरा गुणगान
ईश्वर दे दो यह वरदान ।

विन्ध्यप्रकाश मिश्र विप्र

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विन्ध्यप्रकाश मिश्र विप्र काव्य में रुचि होने के कारण मैं कविताएँ लिखता हूँ । मै मौलिक विचारों के बिम्ब को लिपिबद्ध करता हूँ । स्वान्तःसुखाय लिखता हूँ । किसी प्रसिद्धि…
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