गीत · Reading time: 1 minute

ईश्वर की सुंदरतम रचना…..!!

विधा – गीत
👇 रचना 👇
#मुखड़ा
ईश्वर की सुंदरतम रचना , कोकिलकंठी युवरानी।
मन मंदिर में इष्टदेव सी , लगती जानी पहचानी।।

#अंतरा
रूप सलोना सुंदर मुखड़ा , अधरों से रसधार बहे।
चाँद चकोरी ! ओ पिक बयनी, अद्भुत जीवन सार कहे।।
सचमुच तेरी प्रीति प्रियतमे , करती मोहक मनमानी ।
ईश्वर की सुंदरतम रचना , कोकिलकंठी युवरानी।।०१।।

कंचन किसलय सा तन तेरा, सुंदरता की फुलवारी।
मंद-मंद मुस्कान लुभाती, लगती सच मुझको प्यारी।।
गजगामिनि बल खाकर मत चल , दुनिया माँगेगी पानी।
ईश्वर की सुंदरतम रचना , कोकिलकंठी युवरानी।।०२।।

कोकिलकंठी गान मनोहर , कर्णों में रस घोल रहा।
बोल पपीहा पिउ-पिउ देखो , अंतस सत्य टटोल रहा।।
सप्तरंग की उठा तूलिका , मत कर कोई नादानी।
ईश्वर की सुंदरतम रचना , कोकिलकंठी युवरानी।।०३।।

उर-अर्णव में नित हिलोर उठ , सृजती नवल कहानी है।
पागल मेरे मन को करती , अल्हड़ शोख जवानी है।।
बैठ सुमन पर गीत सुना दे , ओ मेरी तितली रानी।
ईश्वर की सुंदरतम रचना , कोकिलकंठी युवरानी।।०४।।

✍🏻पं.संजीव शुक्ल ‘सचिन’
मुसहरवा (मंशानगर), पश्चिमी चम्पारण, बिहार

❤️- घोषणा👇👇
यह रचना पूर्णतः स्वयं रचित है
【पं.संजीव शुक्ल ‘सचिन’】

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