"ईश्वर और मै"

हर दिन एक नया इन्तेहाँ,
हर रात एक नयी चुनौती,
हर लम्हा एक नया गम,
हर गम पर मेरी नयी मुस्कान,
न तू हारता है,
न मैं थकता हूँ,
अब तू ही बता मेरे मालिक,
कितने और इन्तेहाँ बाकी हैं
मेरे जिंदगी में लेने को,
कितनी और चुनौतियाँ हैं
तेरे पास मुझे देने को,
कितने और गम बाकी हैं,
मेरे जिंदगी में आने को,
चल एक समझौता करते हैं,
तू एक दिन में जितने चाहे इन्तेहाँ ले ले,
जितनी चुनातियां हैं सब दे दे,
जितने गम हैं वो भी दे दे,
मैं तैयार हूँ,
गर मैं सह गया
और दिन गुजार गया पूरा,
अपनी ख़ुशी के साथ,
मेरी ज़िन्दगी को सुकून बख्शेगा ,
जी लेने देगा मुझे ज़िन्दगी,
मेरे चाहने वाले के साथ,
तू कोई और काँटा नहीं बिछाएगा
राह में मेरी,
तू भी मेरा हो के रहेगा,
बस यही आरजू-ऐ-दिल है मेरी,
तू करता है न वादा??

“संदीप कुमार”

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