Skip to content

इस होली रंग लो मुझे, साजन अपने रंग

लोधी डॉ. आशा 'अदिति'

लोधी डॉ. आशा 'अदिति'

दोहे

March 14, 2017

खुशियाँ लेकर आ गया, होली का त्यौहार
गाल रंगे गुलाल से, रंगों की बौछार

टेसू, सेमल खिल उठे, बजे बसन्ती राग
मस्ती, रंग, गुलाल से, देखो सजता फाग

देख गुलाबों की छटा, शरमाते हैं शूल
कितने रंग बिखेरते, कागज़ के भी फूल

पीली सरसों ने किया, स्वर्ण कनक मनुहार
नीली अलसी मिल हुआ, अजब धरा श्रृंगार

सभी होलिका पूजते, फागुन पूनम रात
कण्डों की होली जले, मानो अब ये बात

गले आज हम सब मिलें, भूल सभी टकराव
होलिका के संग जले, द्वेष बैर के भाव

लाल, गुलाबी, नीले, हरे, पिचकारी के रंग
भूल सभी कटुता चलो, होली खेले संग

महुआ है बौरा रहा, भांग नशे में चूर
रंग, अबीर, गुलाल से, मनः कलुष हो दूर

होली है की गूंज से, दिल में जगी उमंग
इस होली रंग लो मुझे, साजन अपने रंग

सब रंगों में देख लो, प्रेम रंग है खास
पिय रंग में रंग गई, मेरी इक इक श्वास

लोधी डॉ. आशा ‘अदिति’
भोपाल

Share this:
Author
लोधी डॉ. आशा 'अदिति'
मध्यप्रदेश में सहायक संचालक...आई आई टी रुड़की से पी एच डी...अपने आसपास जो देखती हूँ, जो महसूस करती हूँ उसे कलम के द्वारा अभिव्यक्त करने की कोशिश करती हूँ...पूर्व में 'अदिति कैलाश' उपनाम से भी विचारों की अभिव्यक्ति....

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग से अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

साल का अंतिम बम्पर ऑफर- 31 दिसम्बर , 2017 से पहले अपनी पुस्तक का आर्डर बुक करें और पायें पूरे 8,000 रूपए का डिस्काउंट सिल्वर प्लान पर

जल्दी करें, यह ऑफर इस अवधि में प्राप्त हुए पहले 10 ऑर्डर्स के लिए ही है| आप अभी आर्डर बुक करके अपनी पांडुलिपि बाद में भी भेज सकते हैं|

हमारी आधुनिक तकनीक की मदद से आप अपने मोबाइल से ही आसानी से अपनी पांडुलिपि हमें भेज सकते हैं| कोई लैपटॉप या कंप्यूटर खोलने की ज़रूरत ही नहीं|

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you