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इस बार राखी त्योहार”

इस बार राखी त्योहार”

सहमा सा देखो इस बार राखी का त्योहार
हम सब हैं देखो कोरोना की हिरासत में इस बार
नही है इजाजत भाई के पास जाने की इस बार
बस यूँ ही मनाना है राखी का त्योहार इस बार।

आँखों मे तो बस भाई की छवि रहे इस बार
मायूस बैठ बहन को मनाना हैं त्योहार इस बार
लड़ना मानना भी नही हो पायेगा इस बार
बस ये ही अफसोस रह गया राखी में इस बार।

पूरे साल करती रही इस दिन का इंतजार
भाई से मिलना तो बस हुआ अब लंबा से इंतजार
कुछ नही मिले गिफ्ट ओर सौगात बस रहा इंतजार
अगले साल अच्छे से मनाएंगे भाई राखी कर इंतजार।

ईश्वर की लीला के आगे हम सब हैं लाचार
तभी तो नही आया इस बार धेवर ओर अचार
त्योहार का तो बस मन मे ही रह विचार
छोड़ो ईश्वर पर न लाओ मन मे कोई विकार।

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पुस्तकालयाध्यक्ष ग़ाज़ियाबाद में पिछले 22 वर्षों से पब्लिक स्कूल में कार्यरत। लेखन- साहित्य रचना एवं अनेक समाचार पत्रों में लेख,कविताएं प्रकाशित कृतियां- 1-काव्यमंजूषा 2-मातृशक्ति 3-शब्दोत्सव 4-महापुरुष 5-काव्य शब्दलहर 6-अम्बेडकर जीवन…
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