#इस तरह बेटी बिदा हो जाती है#

# इस_तरह_बेटी_बिदा_हो_जाती

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आज दशा पर बेटी की यह,
बाबुल नीर बहाये।
ब्याह रचाने बेटी का खुद,
दिल पत्थर रख जाये।।
माँ खुश भी है पर रो-रोकर,
बुरा हाल कर जाती।
बिछड़न की हर बात सोचकर,
मन ही मन घबराती।।
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भाई प्यारा राज दुलारा,
दर से हाथ छुड़ाता।
तोड़ रहा रक्षा -बन्धन का,
मानो दिल से नाता।।
तड़प-तड़पकर गले मिले वह,
रोती और रुलाती।
प्यार भरे बाबुल आँगन में
खुद को निर्बल पाती।।
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एक सवाल जहन बेटी का,
बार-बार फिर पूछे।
कौन पाप का बदला मुझसे
क्यूँ हो सारे रूठे।।
गोद खिलाया माँ-बापू ने,
औ आँगन की माती।
दूध पिलाया जो आँचल भर,
क्यूँ नहि फटती छाती ।।
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कैसे जियेगी ये अभागन,
तेरे दामन बिन माँ।
कैसे भूले संग बिताये,
जो रतियाँ औ दिन माँ ।।
बिछड़े रिश्ते सारे प्यारे,
क्यों नहि रोक लगाती।
क्या लिक्खा तकदीर खुदा ने,
क्यूँ नहि तुम समझाती।।
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इक आँसू पर जान छिड़कता,
भाई गया कहाँ वह।
लाडो कहते थकता नहि था,
बापू कहाँ ? जहाँ कह।।
क्यूँ बेटी को पाला पोसा,
क्यूँ ये रश्म निभाती।
जिस दुनिया की लाडो मैं हूँ,
तहँ क्यूँ नहि रह पाती।।
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सबहि बात अनसुनी करें सुन,
सबहि दुआयें देते।
तड़पे बेटी का मन फिर भी,
डोली बिठाय देते।
बहा-बहा कर आँसू नयनन,
अपनों को खो जाती।
बाबुल के आँगन से #बेटी,
तड़प बिदा हो जाती।।
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संतोष बरमैया #जय

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