May 13, 2021 · कविता
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इस अंधे युग में

खुद का नहीं पता
अपने घर वालों का पता नहीं
पता
यह कैसा वक्त का दौर है
जमाने की अंधी दौड़ है
खुद जिन्दा हैं
सांस ले रहे
घर में कौन बीमार है
तकलीफ में है
मर गया है
मर रहा है
नहीं पता
अपने ही परिवार में
रमे हैं
दुनिया को खुश करने
में लगे हैं
मंदिर जा रहे हैं
पूजा अर्चना,
दान पुण्य और
न जाने कितने
कर्मकांड और
आयोजनों में शामिल हो
रहे हैं
मां बाप होते हैं
कितने
बहुमूल्य कोहिनूर
उनका जनाजा उठ गया
और उनके बच्चों का
एक आंसू नहीं गिरा
कलेजा बाहर को नहीं
निकला
दिल नहीं फटा
खुदा तू अब अपने रहम की
बारिश कर
ऐसे पत्थर दिल लोगों को
थोड़ी सी तो समझ दे
न जाने किस दौड़ में
शामिल है यह आज की
युवा पीढ़ी
किस दिशा में जा रहे हैं
हे मौला
मेरी तो इस अंधे युग में
तुझसे यही प्रार्थना है कि
इनका मार्गदर्शन कर
इनको सद्बुद्धि दे।

मीनल
सुपुत्री श्री प्रमोद कुमार
इंडियन डाईकास्टिंग इंडस्ट्रीज
सासनी गेट, आगरा रोड
अलीगढ़ (उ.प्र.) – 202001

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Minal Aggarwal
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