Jul 26, 2016 · कविता
Reading time: 1 minute

इश्क़

जब भी बैठता हूँ कुछ लिखने
डूब जाता हूँ उनकी यादों के समंदर में
मदहोश कर देती हैं उनकी यादें
क्यूंकि….
इश्क़-ए-मौहब्बत की स्याही
अब सूख चुकी है….

सुनील पुष्करणा

55 Views
Copy link to share
Suneel Pushkarna
50 Posts · 4.2k Views
Follow 1 Follower
suneelpushkarna@gmail.com समस्त रचना स्वलिखित View full profile
You may also like: