इश्क़ पर फेसबुक से करते हैं

पहरो-पहरों जो बात करते हैं
फोन का बिल वो रोज़ भरते हैं

फोन की नोटबुक में लिखना है
डायरी पैन अब अखरते हैं

सब ही ऐपों के लोग दीवाने
इश्क़ पर फेसबुक से करते हैं

टॉक विडिओ से रोज़ होती है
फ़ासले पल में यूँ बिखरते हैं

नेट से दोस्ती हुयी पक्की
दुश्मनी टुवीटरों पे करते हैं

रेड़ियो हो गयी पुरानी अब
लेड टी वी से घर संवरते हैं

अब ज़रूरत नहीं गुलाबों की
गिफ्ट में फोन भेंट करते हैं

ज़ीस्त कम्प्यूटरों ने बदली है
ये ही ‘आनन्द’ बात करते हैं

-डॉ आनन्द किशोर

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