Sep 14, 2016 · मुक्तक
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इश्क़ का फलसफ़ा

मुहब्बत तो इबादत है तिजारत इसको मत कहिए
ये जज़बाती हक़ीक़त है ज़रूरत इसको मत कहिए
‘चिराग़’इस दिल के काग़ज़ पर लिखे हैं आंसुओं से जो
ये हैं जज़्बात रूहानी इबारत इसको मत कहिए

चिराग़ बैसवारी

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Deepesh Dwivedi
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साहित्य,दर्शन एवं अध्यात्म मे विशेष रुचि। 34 वर्षो से राजभाषा कार्मिक। गृहपत्रिका एवं सामयीकियों मे... View full profile
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