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इश्क में सताया भी बहुत है

Bhupendra Rawat

Bhupendra Rawat

गज़ल/गीतिका

August 24, 2017

इश्क में सताया भी बहुत है
इश्क में रुलाया भी बहुत है

बहती रही कश्ती पानी में
कश्ती को डुबाया भी बहुत है

आग को लगाया भी बहुत है
जंगल में फैलया भी बहुत है

सपने दिखाकर रातों नींदों में
राह से भटकाया भी बहुत है

आब -ऐ – तल्ख पिलाया भी बहुत है
तिश्र्गी ऐ आब में तरसाया भी बहुत है

आग(वासना)की आगोश में सुलाकर
आश्रा के लिए भगाया भी बहुत है

जख्म देकर घायल कर गए है
दर्द में रुलाया बहुत है

खिदमत में लगे है उनकी
जिनका ख्याल दिल में आया बहुत है

गुनाह कबूल है उनके सारे आज तक
क्यूंकि उन्होंने भूपेंद्र को गिराया बहुत है

भूपेंद्र रावत
23/08/2017

Author
Bhupendra Rawat
M.a, B.ed शौकीन- लिखना, पढ़ना हर्फ़ों से खेलने की आदत हो गयी है पन्नो को जज़बातों की स्याही से रँगने की अब बगावत हो गईं है ।
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