इश्क का एहसास भी क्या खूब है जाना

इश्क का एहसास भी क्या खूब है जाना
कभी हंसते हंसते रोना , कभी रोते रोते मुस्कुरान

प्यार करना , मगर जबरन हक मत जताना
उनका प्यार फूल है , फूलों को जरा आहिस्ता सहलाना

वह अगर तुमसे रूठ जाए , यह हक है उनका
तो तुम उन्हें मनाना , तुम भी उनसे मत रुठ जाना

किसी की मीठी बातों का इतना ऐतबार भी मत करना
हवाओं की फितरत होती है वादियों से दिल लगाना

तुम आजाद हो अपनी राहे चुनने के लिए मेरी जाना
बस एक एहसान करना , अपनी यादें मेरे जीने के लिए छोड़ जाना

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