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*** तेरी ख्वाहिश ***

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

कविता

February 9, 2017

क्या कहूं एक तेरी ख्वाहिश
है कि मिटती ही नहीं

जितना करता हूं तेरा दीदार
उतना ही खाली होता जाता हूं

तेरे साथ भरी भरी ये जिंदगी
सुकून से जीने को कहती है

दूसरी ओर मौत मुझसे नजदीकियां
कायम करने को आमादा है

अब बता जिंदगी से हार जाऊं या
मौत की जंग में जीतकर आऊं

फैसला करना है अब तुमको अब
गले मौत को लगाऊं या तुमको ।।

? मधुप बैरागी

Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि... Read more
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