गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

इन अश्कों से जाना ग़ज़ल हो रही है

इन अश्कों से जाना ग़ज़ल हो रही है
पिला गम की हाला ग़ज़ल हो रही है

ये तन्हाइयां साथ हैं अब हमारे
न आवाज देना ग़ज़ल हो रही है

लजाती निगाहों में झाँका जो हमने
मुहब्बत की देखा ग़ज़ल हो रही है

लिखें धड़कनें और खामोश लब हैं
बिना शब्द उम्दा ग़ज़ल हो रही है

दबा दर्द ही निकला था आह बनकर
कि लोगों ने समझा ग़ज़ल हो रही है

गए प्यार में डूब यूँ ‘अर्चना’ हम
जिधर देखें लगता ग़ज़ल हो रही है

डॉ अर्चना गुप्ता

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