कविता · Reading time: 1 minute

इन्साफ

होती नहीँ रात
रात भर के लिए हमेशा
रात के बाद
आता है दिन जीवन में

अंधेरा रहता नहीँ हमेशा
अंधेरे ऊजाले का है
साथ हमेशा

मिले जीवन में
कभी असफलताएं
छाने लगे अंधेरा सा
जीवन में
हारना नहीं है हिम्मत
बढना लक्ष्य की ओर
दोगुने जोश से
मिलेंगी सफलताएं
बढ़ेगा जोश हमेशा

पालती है माँ
रात रात जाग कर
बच्चों को
एक रात नहीं
जाग पाता बेटा
बीमार माँ के लिए

रात रात जाग
सैनिक करता है रक्षा
देश की और
करते हैं गद्दार
गद्दारी देश से
बन कर बेशर्म

बनों मत इतने भी
नादां इन्सा
होता है इन्साफ
कुदरत का
करती है इन्साफ
बांध पट्टी आँखों पर
इन्साफ की देवी से
दिन रात में

स्वलिखित
लेखक संतोष श्रीवास्तव भोपाल

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