इन्सानियत गरीबी में ही पलती है

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इन्सानियत गरीबी में ही पलती है।
थोड़ी सी ही खुशी मिल बाट ले,
अमीरों को इतनी फुर्सत कहाँ मिलती है।
थोड़ा में ही सही मिल बाट के खाए,
ये हुनर गरीबों को ही आता है।
अमीर तो दूसरे का हिस्सा भी
छिन कर अपना घर भरता है।
इन्सानियत गरीबी में ही पलती है।
????—लक्ष्मी सिंह ??

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