कविता · Reading time: 1 minute

इन्तिहा

उम्र भर यादों के वो साए , कभी मिटा नहीं पाते ,
दिल ने जो सदमे उठाए , कभी भुला नहीं पाते ,
आँखों से बहते अश्कों को , कभी रोक नहीं पाते ,
हम जो उजालों में पले बढ़े , अंधेरों में कभी रह नहीं पाते ,
दिल में कुछ ऐसे ज़ख्म़ हैं , जिन्हें कभी दिखा नहीं पाते ,
अपनी रूदादे दिल , कभी सुना नहीं पाते ,
ज़हन में बसी है जो तस्वीर , उसे कभी मिटा नहीं पाते ,
वफ़ा में सब कुछ लुटा के भी , यू्ँ होश में नही आ पाते ,
जब चारागर ही ज़ख्म दे जाए ,
अब ये अलम हम उठा नहीं पाते ,

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