इतनी खुबसुरत हो तुम

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Diwakar Mahto
Diwakar Mahto
Dec 27, 2019 · कविता
इतनी खुबसुरत हो तुम
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यकीन नहीं होता,
यकीन नहीं होता, की इतनी खुबसुरत हो तुम ।
इन्सान नहीं,
इन्सान नहीं, कोई देवी की मुरत हो तुम ।।

मेरी जिंदगी , मेरी चाहत हो तुम ।
मेरे बेचैन दिल की ,राहत हो तुम ।
अगर मैं इश्क हूँ , तो मेरी जज्बात हो तुम ।
मेरे तन्हाईयों में, अद्वितीय मुलाकात हो तुम ।।

यकीन नहीं ….

मेरी आँखों की शरारत हो तुम ।
मेरी अनुराग, मेरी इबादत हो तुम ।
क्या हो तुम मेरे संसार में, ये बताना है मुश्किल ।
बस इतना कह सकता हूँ मैं , मेरी मोहब्बत हो तुम ।

यकीन नहीं ….

मेरी कहानी के पन्नों की हसरत हो तुम ।
मेरे इन्हीं पन्नों की लत हो तुम ।
मेरे जिंदगी के लिफाफे की खत हो तुम ।
मेरे दिल में मेरी जान, शाश्वत हो तुम ।।

यकीन नहीं होता,
यकीन नहीं होता, की इतनी खुबसुरत हो तुम ।
इन्सान नहीं,
इन्सान नहीं, कोई देवी की मुरत हो तुम ।।

—-राँची , झारखंड ।

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I.Sc Completed diploma in branch cse from GP Dumka (15-18). Persuing in BTECH in cse...
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