कविता · Reading time: 1 minute

इतना मुश्किल भी नही

इतना मुश्किल भी नही,
आसानी से मंज़िलों को पा जाना,
और मुस्कुराना,
सच मानो, इतना मुश्किल नही है,
बस एक ही बात है मन को समझाना,
बिना रुके बढ़ते जाना,
मिले असफलताएँ तो हिम्मत न हारना,
फल की चिंता छोड़ कर्म करते जाना,
सब कुछ खो देना भी है,
अनुभव को पाना,
कर्मपथ पर बढ़ते जाना,
चिर-स्थायी क्या है यहाँ,
जो इतना माया से मोह बढ़ाना,
आज जो है, वो कल नही भी होगा,
फिर क्यूँ इतना घबराना !
हर रात के बाद निश्चित है सुबह का आना,
इसी तरह हर दुख के क्रम के बाद,
निश्चित है सुख का आ जाना,
असफलताएँ ही है सफलता का मीलपत्थर,
तो इनसे क्या पीछा छुड़ाना,
सफलता का एक ही मूल-मंत्र,
बिना रुके प्रयास करते जाना,
कर्मपथ पर बढ़ते जाना….

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