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इज़हारे बफा

Madhu Nagar

Madhu Nagar

कविता

March 20, 2017

इजहारे बफा करते है वो शौक़ से ,
क्या करे यह हमें गवारा नहीं ।
इश्क़ में डूबे इतना कि तुम्हारा साथ हो
दर्दे इश्क़ सिर से उतारना गवारा नहीं ।
दिदारे यार चॉद मे करते हैं कभी कभी ,
सितारों को परेशान करना गवारा नहीं ।।
पत्थरों पर बहता झेलम का पानी क्या ?
रूनझुन तेरी पायल,पर यह झूठ गवारा नहीं ।
तसवूरे इश्क़ मे खोये इतना चले आओ
शायद यह इन्तज़ार चॉद चॉदनी को गवारा नहीं ।।
मधु

Author
Madhu Nagar
लेखनी के माध्यम से अपनी कल्पना और भावात्मक विचारों की अभिव्यक्ति मुझे काव्य लेखन की ओर ले आई है । अतः आनन्द का अनुभव हो रहा है और मन में लिखने की उमंग बनी रहती है।
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