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*** इच्छा शक्ति ***

* ॐ *
।। श्री परमात्मने नमः ।।
#*#* इच्छा शक्ति #*#*
लघु कथा –
एक महात्मा जी विदेश में किसी परिवार के घर में गये थे।जिनके घर रुके हुए थे वहाँ पति – पत्नी दोनों महात्मा जी की सेवा करके अपने काम पर नौकरी करने चले जाते थे ।
स्वामी जी भी सुबह सबेरे ताजी हवाओं में घूमने के लिए निकल जाते थे रास्ते में एक भव्य सुंदर मकान था उसमें हरे भरे रंगीन पेड़ – पौधे फल फूलों के बगीचे थे वह घर बहुत बड़ा सा लेकिन साफ सुथरा व्यवस्थित ढंग से सजाया गया था।
स्वामी जी रोज वहाँ से गुजरते लेकिन कोई भी व्यक्ति उस मकान पर दिखाई नहीं देता था एक दिन स्वामी जी की नींद जरा देर से खुली और फिर भी वह उसी रास्तों पर घूमने निकल गए तो उस मकान पर एक बुढ़िया साफ सफाई व्यवस्था कर रही थी स्वामी जी ने रुककर उस बुढ़िया से पूछा कि यह सुंदर सा बगीचा किसका है एकदम साफ सुथरा व्यवस्थित तरीके से सजाया गया है इसकी देखभाल कौन करता है तो उस पर उस अधेड़ उम्र की महिला ने बताया कि यह घर मकान मेरा ही है और इसकी साफ सफाई व्यवस्था पेड़ – पौधे लगाने का काम की जिमेदारी भी मेरी ही है
इस पर स्वामी जी ने कहा – आप इतनी अधिक उम्र में भी इतना काम आसानी से कैसे कर लेती हैं आपको थकान महसूस नही होती है बोरियत या आलस नही आता है ।
उस पर अधेड़ उम्र की महिला ने कहा – इतने सुंदर पेड़,पौधे को देखकर ही तो आप मुझसे मिलने बात करने यहाँ चले आये हैं।
इन पेड़ ,पौधों को देखकर जो खुशियाँ आनंद इस काम में मिलता है उससे जी क्यों चुराये हमें तो रस मिलता ही है और लोगों को देखने वालों को भी अच्छा लगता है।
इस कार्य को खुद अकेले करने से ही मन भी खुश रहता है और इसी बहाने खुद को उलझाए रखकर वक्त भी गुजर जाता है शरीर भी स्वस्थ मन में सकारात्मक ऊर्जा ताजगी मिलती रहती है।
स्वामी जी उस अधेड़ उम्र की महिला की बातों से बड़े प्रभावित हुए कहा सच में अपने तनमन को किसी भी अच्छे कार्यों में उलझाए रखने से जो प्रेरणा ख़ुशी मिलती है यही जीने का असली आनंद है अनमोल तोहफा है।
उस अधेड़ उम्र की महिला की कही गई बातों से स्वामी जी बड़े प्रभावित होकर उंनका आदर भाव से सादर अभिवादन किया ।
सही भी है कि जब हम साफ सुथरे व्यवस्थित तरीके से जीवन जीते हुए व्यवहार शील बर्ताव भी करते हैं तो लोगों के प्रति जागरूक मिलने के लिए हमेशा उत्सुक भी रहते हैं और एक असीम कृपा बरसती है मन को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है मन एकदम शांत चित्त स्वरूप दिखाई देता है।
सीख – उम्र चाहे कितनी भी क्यों न हो जाय हमें नियमित रूप से प्रतिदिन नियम ,अनुशासन से कार्य सुचारू रूप से जारी रखना चाहिए और किसी भी कार्य के प्रति जागरूक होकर लगन के साथ मेहनत से इच्छा शक्ति द्वारा दृढ़ संकल्प लेकर कार्य करते ही रहना चाहिए
जब हम कोई अच्छे कार्यों में सच्ची लगन ,मेहनत से लगे रहते हैं तो ईश्वर भी हमारे कार्यों की सराहना करते हुए मदद करने के लिए हमेशा ही आसपास मौजूद रहते हैं।
एक दृढ़ इच्छाशक्ति से ही जीवन में सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर सुखद आश्चर्य परिणाम स्वरूप वरदान प्राप्त होता है।
*** राधैय राधैय जय श्री कृष्णा ***
*** शशिकला व्यास *** कमलयिनी

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Shashi kala vyas
Shashi kala vyas
Bhopal
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एक गृहिणी हूँ मुझे लिखने में बेहद रूचि रखती हूं हमेशा कुछ न कुछ लिखना...
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