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इक महकते गुल ने गुलाब भेजा है…

suresh sangwan

suresh sangwan

गज़ल/गीतिका

December 5, 2016

इक महकते गुल ने गुलाब भेजा है
एक दो नहीं पूरा सैलाब भेजा है

हर शख़्स बस उसकी मिसाल देता है
क्या खूब रब ने देकर शबाब भेजा है

इस तरह खींची हैं तस्वीरें अपनी
तस्वीर में जैसे महताब भेजा है

लबरेज़ हैं आँखें ख्वाबों से उसकी
ईमान लूट जाए वो ख़्वाब भेजा है

उसकी अदाएं जुदा बहुत हर एक से
दिल खोल के हाये गिर्दाब भेजा है

चल इन सितारों सा चमक ए दिल मेरे
तुझको चुना ओ इंतिखाब भेजा है

जज़्बात हैं उल्फ़त में कुछ सिमटे से
धड़कते दिल से यूँ अदाब भेजा है

—–सुरेश सांगवान’सरु’

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Author
suresh sangwan

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