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इक बार मुझे भर के नज़र देख लेने दो………………..

suresh sangwan

suresh sangwan

गज़ल/गीतिका

November 26, 2016

इक बार मुझे भर के नज़र देख लेने दो
अपनी मोहब्बत का असर देख लेने दो

हर तस्वीर में मेरी तेरे ही रंग हों
उन तस्वीरों को जी भर देख लेने दो

मिट जाते हैं डूबकर इश्क़ के तूफ़ां में
उस शब की बस मुझको सहर देख लेने दो

तेरी खुश्बू से महके ये आलम सारा
उन गलियों से मुझे ग़ुजरकर देख लेने दो

होके बेखुद दुनियाँ से जम जायें मुझ पर
वो मस्ती में डूबी नज़र देख लेने दो

बरस रहें हैं बरसों दिल में कुछ अरमां
भीगा मौसम दिल में उतरकर देख लेने दो

शाखें लहरा के महके वज़ूद पर ‘सरु’ के
झुका हुआ उलफत का शज़र देख लेने दो

सुरेश सांगवान’सरु’

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Author
suresh sangwan

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