इक फूल को छूने के लिए हाथ बढ़ाया

इक फूल को छूने के लिए हाथ बढ़ाया
गुलशन में अनादिल नें बहुत शोर मचाया

मुझको शबे-ए-फुरक़त में तेरी याद जो आयी
मैंने तेरी तस्वीर को सीने से लगाया

जाते ही ख़िज़ां झूमती आईं जो बहारें
ख़ुशरंग परिंदों ने नशेमन को सजाया

एक हुस्न-ए -इत्तफ़ाक़ समझ लीजिये इसको
नफरत थी मुझे जिससे वही काम भी आया

हमदर्दी जताने को वही आये हुए हैं
जिन लोगों ने मिल जुल के मेरे घर को जलाया

जब सख़्त घड़ी कोई भी आयी है वतन पर
हमने भी हिफ़ाज़त के लिए ख़ून बहाया

आ जाएगी नींद अब तो यक़ीनन तुझे ‘ग़ाज़ी’
सर पर है तेरे उसकी हसीं ज़ुल्फ़ का साया

Meanings :
अनादिल- बुलबुलें(पंछी)
नशेमन- घोंसला
शबे-ए-फुरक़त- जुदाई की रात

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