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** इक दूजे के होंलें हम **

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

कविता

March 20, 2017

रंगो का त्यौहार है होली
अपनों का प्यार है होली
भूलों का सुधार है होली
गुलो से गुलज़ार है होली।।
?होली मुबारक

मिल जायें होली में रंग
हरा-नीला लाल-पीला
मिल जायें सब इकसंग
भेद ना कोई जान सके
संग मिला कौन सा रंग
भेद मिटा इकदूजे का
मिल जाये संगसंग हम
होली है होली है होली
इकदूजे के होंलें हम ।।
?मधुप बैरागी

Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में... Read more
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