.
Skip to content

** इंसान हो तुम **

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

गीत

March 10, 2017

प्रारम्भिक बोल
**********
कश्तियां यूं ही
डूबती रह जायेगी
होंसला है जिसके हाथ
वो पार सागर कर जायेगा
तर जायेगा बिन पतवार
********************
इंसान हो तुम
इंसान हो तुम
किनारे वही रह जायेंगे
मौजे कितना बुलायेगी
मांझी कब तक पुकारेगा
जीवन है चलने का नाम
***********
इंसान हो तुम
तुम इंसान हो
***********
मत घबरा इन उलझनों से
एक दिन हो जायेगा पार
यार सुन अब दास्तां ग़म
कब तक ठहर पायेगा
जिद ना कर रुकने की अब
जीवन क्या ठहर जायेगा
***********
इंसान हो तुम
तुम इंसान हो
****************
इक पहर थोड़ा ठहर
चल फिर मंजिल पायेगा
जो बिता उसको जाने दे
अब पछताये क्या हो पायेगा
है इंसान तूं ये समझ
कब तक तूं रुक पायेगा
******************
इंसान हो तुम
तुम इंसान हो
**********
जीतेगा इकदिन हार के
जीवन को यूं वार के
इंसान हो तुम
तुम इंसान हो
हां तुम इंसान हो ।।
?मधुप बैरागी

Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि... Read more
Recommended Posts
नारी अबला
#नारी_अबला हे..! नारी.. तुम प्रमदा, तुम रूपसी, तुम प्रेयसी, तुम ही भार्या, तुम ही सौन्दर्या, तुम सुदर्शना, तुम अलभ्य अनिर्वचनीया| फिर भी तुम अबला..! हे..!... Read more
कफ्न की कीमत चुकानी रह गयी
कर्ज वो सारा चुकाकर मर गया कफ्न की कीमत चुकानी रह गयी कर के वादा आज भी आये न वो बस महकती रातरानी रह गयी... Read more
दर्द है, आँखों से मोती बन निकल ही जायेगा
दर्द है, आँखों से मोती बन निकल ही जायेगा सिरफिरा बन अब तू किधर को जायेगा ना होगा साथी कोई तेरे सफर का अब तू... Read more
मुक्तक
जब पुकारेगा खुदा सब कुछ धरा रह जायेगा छोड़ दुनियाँ रूह से अपनी जुदा रह जायेगा रुप अपना तू निखारे देख कर के आयना एक... Read more