May 13, 2021 · कविता
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इंसानियत

आज का कुछ ऐसा हैं दौर
हर तरफ है बस शोर ,
यू तो गली मौहल्ले है सुनसान
बस सबके दिलो मे मचा है तुफान,
इंसान बस बचा है नियत का कुछ अता पता नही
इंसानियत दिखाओ अभी भी बहुत कुछ बिगडा नही!
– सुरभी

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Surabhi bharati
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I love writing....that's it😊i am done iti in copa,bca(computer application),B ed (pursuing) View full profile
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