***"इंद्रदेव को संदेश"***

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*इंद्रदेव को सन्देश *
हे …! इंद्रदेव अब ना बरसो क्यों रूठे हो मान भी जाओ
चहुँ ओर पानी का सैलाब उमड़ त्राहि त्राहि कोहराम मचाया है।
वसुंधरा की प्यास बुझ गई अब तो वापस लौट जाओ
मानव की दर्द की पुकार सुनो हाथ जोड़कर खड़ा हुआ है।
गाँव शहरों गली मोहल्ले में राहत अब दे जाओ ,
दीवारों में सीलन बदबू सड़को पर कीचड़ फिसलन हुआ है।
धूप छाँव में लुकाछिपी खेलते निज निवास चले जाओ ,
फसलें बर्बाद हो गई किसानों की नैनो में अश्रुधारा बहता हुआ है।
पितरों के आगमन में पूड़ी ,बड़ा,
मीठी खीर खाओ,
रौद्र रूप अवतार लिए हुए क्यो अडिग सा डटा हुआ है।
हे मेघराज इंद्र देव सुन लीजो अपने स्थान में जाओ ,
अगले बरस जल्दी आना उम्मीद का दामन थामें मानव खडा हुआ है।
अब मानव जीवन पर दया करो वापस लौट जाओ,
विदाई की घड़ी में मानव शीश झुकाते क्षमा याचना किये खड़ा हुआ है।
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*शशिकला व्यास*
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