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इंदिरा गांधी जी को जन्मदिन पर शत् शत् नमन

अदा रखती थी मुख्तलिफ ,इरादे नेक रखती थी ,

वतन की खातिर मिटने को सदा तैयार रहती थी .

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मोम की गुड़िया की जैसी ,वे नेता वानर दल की थी ,,

मुल्क पर कुर्बां होने का वो जज़बा दिल में रखती थी .

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पाक की खातिर नामर्दी झेली जो हिन्द ने अपने ,

वे उसका बदला लेने को मर्द बन जाया करती थी .

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मदद से सेना की जिसने कराये पाक के टुकड़े ,

शेरनी ऐसी वे नारी यहाँ कहलाया करती थी .

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बना है पञ्च-अग्नि आज छुपी है पीछे जो ताकत ,

उसी से चीन की रूहें तभी से कांपा करती थी .

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जहाँ दोयम दर्जा नारी निकल न सकती घूंघट से ,

वहीँ पर ये आगे बढ़कर हुकुम मनवाया करती थी .

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कान जो सुन न सकते थे औरतों के मुहं से कुछ बोल ,

वो इनके भाषण सुनने को दौड़कर आया करती थी .

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न चाहती थी जो बेटी का कभी भी जन्म घर में हो ,

मिले ऐसी बेटी उनको वो रब से माँगा करती थी .

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जन्मदिन ये मुबारक हो उसी इंदिरा की जनता को ,

जिसे वे जान से ज्यादा हमेशा चाहा करती थी .

शालिनी कौशिक

[कौशल ]

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शालिनी कौशिक
शालिनी कौशिक
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पेशे से अधिवक्ता, जागरण-जंक्शन, अमर उजाला, जनवाणी में नियमित रूप से रचनाओं का प्रकाशन, कौशल,...
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