आ सजाऊँ भाल पर चंदन तरुण

चेतनामय लोकहित जागो निपुण
धरणि पर बैकुंठ का हो अवतरण
राष्ट्र पुलकित कहेगा सम्मान से
आ सजाऊँ भाल पर चंदन तरुण
़़़़़़़़़़़़़:़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” कृति का मुक्तक (परिष्कृत मुक्तक)
पेज -21
03-05-2017
साहित्यपीडिया पर प्रकाशित मेरी रचनाओं में से कुछ रचनाएं “जागा हिंदुस्तान चाहिए” कृति की रचनाएं है |”जागा हिंदुस्तान चाहिए” कृति की कुछ रचनाओं को परिष्कृत कर (सुधार कर)साहित्य पीडिया पर प्रकाशित किया गया है | साहित्य पीडिया पर प्रकाशित मेरी रचनाओं के अनुसार पाठक बंधु कृति की रचनाओं को परिष्कृत कर सकते हैं |

बृजेश कुमार नायक
सुभाष नगर ,कोंच
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता
03-05-2017

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