.
Skip to content

आ रहे है

विजय कुमार नामदेव

विजय कुमार नामदेव

गज़ल/गीतिका

February 18, 2017

बेशर्म की कलम से

आ रहे हैं

दिन दिन निखरते जा रहे हैं।।।
क्या अच्छे दिन आ रहे हैं।

अपने घर का गेहूं जाने।
किस चक्की पर पिसा रहे हैं।

भाभी जी सरपंच हो गईं।
भैया जी अब मुटा रहे हैं।

सड़के पानी घास टपरिया।
जाने क्या क्या पचा रहे हैं।।

देख बेशर्म हाल गाँव का।
मन ही मन शरमा रहे हैं।

विजय नामदेव बेशर्म
गाडरवारा 9424750038

Author
विजय कुमार नामदेव
सम्प्रति-अध्यापक शासकीय हाई स्कूल खैरुआ प्रकाशित कृतियां- गधा परेशान है, तृप्ति के तिनके, ख्वाब शशि के, मेरी तुम संपर्क- प्रतिभा कॉलोनी गाडरवारा मप्र चलित वार्ता- 09424750038
Recommended Posts
सच कहकर
अपने मन को यूं ही मत भरमाओ जी।। गीत वफ़ा के एक दफ़ा तो गाओ जी।। खूब चलाओ गोली सीमा पर जाकर।। पर किसान पर... Read more
बहिन जी
प्रगति पथ पर बढ़ो बहिन जी। शिखर सब ऊँचे चढ़ो बहिन जी।। बैठे-बैठे कब क्या होगा। पड़े-पड़े मत सड़ो बहिन जी भाई का भी नाम... Read more
हैपी या अनहैपी न्यू इयर
सुबह सुबह नव वर्ष मन गया वर्मा जी का। जब उन्होंने गुप्ता जी को बोल दिया हैपी न्यू इयर भाई साहब। वर्मा जी को भी... Read more
बेशरम
दिल ही है बेशर्म या दिलदार बेशरम। करना नही है प्यार का व्यापार बेशरम।। लड़ने पे है अमादा तो लड़ता नही क्योकर। क्यों डर के... Read more