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आ तो सही इक बार मेरे गाँव में

बसंत कुमार शर्मा

बसंत कुमार शर्मा

गज़ल/गीतिका

July 13, 2017

आ तो सही इक बार मेरे गाँव में
अद्भुत अतिथि सत्कार मेरे गाँव में

हर वक्त रहते हैं खुले सबके लिए
सबके दिलों के द्वार मेरे गाँव में

तालाब नदियाँ और पनघट की छटा
है प्रीति का विस्तार मेरे गाँव में

सम्मान पूरा है बुजुर्गों का यहाँ
होते नहीं वे भार मेरे गाँव में

सब बाँटते मिल साथ में सुख और दुख
हो जीत या फिर हार मेरे गाँव में

Author
बसंत कुमार शर्मा
भारतीय रेल यातायात सेवा (IRTS) में , जबलपुर, पश्चिम मध्य रेल पर उप मुख्य परिचालन प्रबंधक के पद पर कार्यरत, गीत, गजल/गीतिका, दोहे, लघुकथा एवं व्यंग्य लेखन
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