मुक्तक · Reading time: 1 minute

*आज़ का सच*

भोली-भाली सूरत होती
काली लेकिन सीरत होती
हो अंतर में शैतान बसा
घर में रब की मूरत होती
*धर्मेंद्र अरोड़ा*

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