*आज़ का सच*

भोली-भाली सूरत होती
काली लेकिन सीरत होती
हो अंतर में शैतान बसा
घर में रब की मूरत होती
*धर्मेंद्र अरोड़ा*

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*काव्य-माँ शारदेय का वरदान * Awards: विभिन्न मंचों द्वारा सम्मानित
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