गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

आज़ाद गज़ल

दीन ओ इमान बेच कर खाऊँगा
देख लेना मैं खूब पैसे कमाऊँगा ।
ज़ेहन और ज़मीर की बात न कर
उन्हें तो ज़िंदा ही दफना आऊँगा।
लोग भले समझें मुझें पत्थर दिल
कतरा भी न मै आंखो से बहाऊँगा ।
मुझे किसी के बेबसी से क्या लेना
मैं तो उस पर ही हुक्म चलाउँगा ।
भाड़ में जाए सच्चाई ओ इमानदारी
खुद को खुंखार खुदगर्ज बनाऊँगा।
देख ली है मैनें मसीहाई का नतीज़ा
पीर,पैगंबर संतो से पीछा छुड़ाऊँगा ।
आज फ़िर से पी कर आ गए अजय
चलो पहले तुम्हारा नशा उतरवार्ऊँगा
-अजय प्रसाद

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