गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

आज़ाद गज़ल

लोग यहाँ बेमौत मर रहे हैं
और आप शायरी कर रहे हैं ।
कमाल के शख्स हैं आप भी
जिम्मेदारियों से मुकर रहे हैं ।
इतने खुदगर्ज़ कैसे हो गए
कि संकट में भी संवर रहे हैं ।
इस कदर बेरूखी हालात से
हो कैसे आप बेखबर रहे हैं ।
ज़रा अपने पूर्वजों की सोंचे
क्या कभी लोग बेहतर रहे हैं ।
अब दिमाग मत चाटो अजय
हमारे दिल क्या पत्थर रहे हैं ।
अजय प्रसाद

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