गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

आज़ाद गज़ल

क्या मिलेगा भला मुझे फरियाद कर के !
जब खुश हो खुदा ही बरबाद कर के ।

अब न लौटेंगे कभी इस गमे हयात में
जा रहा हूँ मैं बदन को आज़ाद करके ।

लुट गई हस्ती सरे राह चलते-चलते
देखा है मैंने रास्ते भी आबाद करके ।

भला हो तेरा मेरी किश्ती डुबोने वाले
ले मै चला तेरे मन की मुराद करके ।

किसको दुःख है यां अजय तेरे मरने का ।
कौन सा तू गया है कुछ इजाद करके
-अजय प्रसाद

1 Like · 1 Comment · 40 Views
Like
342 Posts · 12.9k Views
You may also like:
Loading...