आज़ाद गज़ल

जी ये हैं मुल्क के मशहूर’शायर रसिक मिज़ाज मिर्जापुरी’
ज़िंदगी भर जिनके लिए बस शायरी ही रही बेहद ज़रुरी ।

वतन के वास्ते कर दिया बर्बाद इन्होंने अपनी जवानी को
इल्म इन्हें था पहले ही आशिक़ी है इनकी बड़ी मजबुरी ।

मुहँ मारते फिरते रहे जनाब दिन रात महबूबा के मुहल्ले में
जिक्र माशुका की करते रहे गज़लों में,की प्रशंशा भुरभुरी ।

तड़प,कसक,लहक,महक,लचक और न जाने क्या क्या
गर पढ़े और सुने इनकी शायरी को तो लगेगी झुरझुरी ।

दिन-दुनिया से बेखबर होकर ही सेवा करी है अदब की
हाँ अब्बा इनके गुजर गए करते हुए दूसरों की जी हुजूरी।
-अजय प्रसाद

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