आज़ाद गज़ल

उम्र भर एक दुसरे को सताते रहे
खुद को हमेशा बेहतर बताते रहे ।
एक घर,एक दर व एक ही बिस्तर
बस अपने अपने रिश्ते निभाते रहे।
कोसते हुए अपने किस्मत को हम
एहसान एक दूसरे पर जताते रहे।
घर-बाहर, बच्चों के लिए ही सही
जिम्मेदारियां खुद की उठाते रहे ।
गर रस्म अदायगी ही है अजय रिश्ते
मर कर भी पति-पत्नी कहलाते रहे ।
-अजय प्रसाद

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