आहें

************ आहें (रोला) ***********
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1
पिया मिलन की पीर,भभकती तन में आहें।
मन में न रहे धीर , तरसती खाली बाहें।।
प्यासे नीले नैन , ताकते रहते राहें।
चित्त रहे बेचैन , प्यासी रहती निगाहें।।
2
छूटा जब से साथ, जुदा जुदा हुई राहें।
हो गया हूँ अनाथ, मन से निकलती आहें।।
काली बोली रात , प्रीतम मिलन को चाहे।
जी भरकर हो बात , झूले आपस में बाहें।।
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सुखविंद्र सिंह मनसीरत
खेड़ी राओ वाली (कैथल)

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सुखविंद्र सिंह मनसीरत कार्यरत ःःअंग्रेजी प्रवक्ता, हरियाणा शिक्षा विभाग शैक्षिक योग्यता ःःःःM.A.English,B.Ed व्यवसाय ःःअध्ययन अध्यापन... View full profile
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