मुक्तक · Reading time: 1 minute

आहत है

आदमी आदमी से भीख मांगता है
जबकी नियत अच्छे से जानता है ।
*****
मशहूर होने की जो चाहत है
हर एक शख्स इससे आहत है ।
भला हो ये सोशल मीडिया का
हरकोई अब ‘कुमार’या’राहत’है ।
-अजय प्रसाद
मंदिर, मस्जिद, पूजा और नमाज़ की बात
क्यों नहीं करते हैं अच्छे समाज की बात।
“मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना ”
तो फ़िर क्यों मानते हैं हम रिवाज़ की बात ।
मुल्क का है अदम से ही मुश्किलों से वास्ता
पता नहीं कब करेंगे हम यां स्वराज की बात ।
-अजय प्रसाद

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