कविता · Reading time: 1 minute

आहट

एक हलकी सी आहट किसी की
बदल देती है ज़िंगदी
अगर न बदली तो उस आहट का फायदा क्या हुआ

जब इंसान ही इंसान का न हुआ
जब अपनों की दुआओं से भी दर्द कम न हुआ

घनघोर अँधेरा है
फिर भी भरोसा है
पर अगर खुद खुदा भी हाथ न थामे
तो उसके दर पर की फरियाद का असर क्या हुआ

एक हलकी सी आहट किसी की
बदल देती है ज़िंगदी
अगर न बदली तो उस आहट का फायदा क्या हुआ

यकीन तो हमे भी खुद पर है
पर अगर किस्मत ही न साथ दे
तो किसी को दोष देने का फायदा क्या हुआ

जब अपना ही कोई हिम्मत तोड़ दे
तो बेगाने से साथ मिलने से
गुरु तेरे सिर इलज़ाम कैसा हुआ

एक हलकी सी आहट किसी की
बदल देती है ज़िंगदी
अगर न बदली तो उस आहट का फायदा क्या हुआ

गुरु विरक
सिरसा (हरियाणा)

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