संकटकाल में धर्म संस्थान साथ निभाएं

भारत में अनेक धर्म संस्थान हैं , जहां प्रतिदिन हजारों-हजार लोग अपनी अगाध आस्था के साथ अपने आराध्य देवी-देवताओं के दर्शनार्थ जाते हैं । लम्बी थका देने वाली कतारों में खड़े होकर
दर्शन के लिए लालायित रहते हैं । आस्था , श्रद्धा और विश्वास लिए अपने आराध्य के दर्शन करते हैं । दान करते हैं ,धर्म संस्थानों को संपन्न बनाते हैं । दर्शन ,दान-धर्म करने वाला प्रत्येक व्यक्ति अपनी दुःख – दुविधा के निवारण की कामना मन में लिए
इन धार्मिक स्थलों पर जाता है कि विपदा में ईश्वर उनकी सहायता करेगा ।आज ऐसी ही विकट संकट की घड़ी सभी के सामने आ खड़ी हुई है । इस विपत्ति में सर्वाधिक प्रभावित वे हो रहे हैं ,जो दीन-हीन हैं , असहाय हैं । आज ऐसे संपन्न धर्म संस्थानों के पास उन दरिद्र नारायण की सेवा करने का पुनीत अवसर हाथ आया है । अत: ऐसे संपन्न धर्म संस्थानों को उन ज़रूरतमंदों की सेवा करने हेतु अपने खजाने को खोल देना चाहिए। ऐसा करके उन धर्म संस्थानों के कर्ता-धर्ता और प्रमुख मानव सेवा में अपना पुनीत और अमूल्य योगदान कर सकते हैं।
उनके इस पुण्य कर्म से लोगों में ईश्वर और धार्मिक संस्थानों के प्रति आस्था , श्रद्धा और विश्वास की भावना बलवती होगी ।

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