मुक्तक · Reading time: 1 minute

आसाराम

करे चिंता जहां भर की, वही भगवान बनता है,
दया-आदर हो मन में तब, मनुज इंसान बनता है।
रति के पति को जो पूजे, बसाए वासना मन में।
तो ऐसा ढोंगी- पाखण्डी ही आसाराम बनता है।।
-विपिन शर्मा

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