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-=- आशीर्वाद – =-

Ranjana Mathur

Ranjana Mathur

कविता

September 5, 2017

जब जब मुझ पर संकट आया मैंने तुझको सम्मुख पाया
विघ्न विनाशक कष्ट निवारक बन बिगड़ा हर काज बनाया।
मेरे कानों में गुंजित है प्रतिपल तेरा यह मीठा आशीष।
कि सत्कर्मों से सदा जुड़े तू दुष्कर्म पर तेरा झुके न शीश।
कभी भी मन में न लाना यह ख्याल तू कि अनाथ हूँ मैं ।
तेरे शीश पर सदैव आशीषों का वरदानी हाथ हूँ मैं।
तू मेरा प्रिय भक्त है और तेरा प्रिय नाथ हूँ मैं।
हर क्षण था मैं तेरे साथ और सदा भी साथ हूँ मैं।

—रंजना माथुर दिनांक 16/07/2017
(मेरी स्व रचित व मौलिक रचना)
©

Author
Ranjana Mathur
भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र... Read more
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