आशियाना

आशियाना’

आज की दुनिया में एक आशियाना बनाना,
समझो पत्थर पे दूब उगाना।
हर जीव को चाहिए सर ढँकने के वास्ते,
एक आशियाना।
पेड़ पर हो घोंसला,
या भूमिगत हो सुरंग,
जमीन पर हो घर,
या दीमक का घरोंदा,
हर जीव अपने जीवन में,
बनाना चाहता है,
एक आशियाना।
कारण है इसका एक ख़ास
अपने परिवार की सुरक्षा
और आराम।
जीवन की विषम स्थितियों से
शत्रु और प्राकृतिक विषमताओं से
रखने को सुरक्षित
हर जीव अपने जीवन में,
बनाना चाहता है,
एक आशियाना।
हर किसी को प्यारा लगता है
अपना आशियाना
छोटा हो बड़ा
झोपड़ी हो या महल
डोर है एक बन्धन है
अपनों को साथ रखने का साधन है।
दूर देश में जाते हैं लेकिन
वापस लौट कर आते है।
अपना आशियाना प्यारा है
जग में सबसे सुंदर और न्यारा है।

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