Oct 14, 2016 · कविता
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आशियाना है वहां

ना
जाने
वो कहां
इस गली
इस शहर
को छोड़कर वो
अब रहता कहां
सो
गए
है जख्म
पर दर्द
है जागे यहां
मैं जिंदा हूं अभी
है मेरी सांसे कहां
क्यूं
रोता
है दिल
टूटकर
बिखरा हुआ
पर अब तेरा
आशियाना है वहां

– सोनिका मिश्रा

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Sonika Mishra
Sonika Mishra
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मेरे शब्द एक प्रहार हैं, न कोई जीत न कोई हार हैं | डूब गए... View full profile
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