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आशा के दीप

डा. सूर्यनारायण पाण्डेय

डा. सूर्यनारायण पाण्डेय

कविता

February 12, 2017

सूर्य,चाँद और तारे
वन, पहाड़ और झरने
शीतल बयार और काले मेघ
सब मुँह चिढ़ाते हैं,
इंसान की बेबसी पर!
मनु के संतानों !
उठो!सजग हो !!
छोड़ो मन के संताप
और व्यर्थ की चिंता
फेंक डालो समस्याओं का चोला
न कोई सुनेगा,
न कोई हरेगा,
तुम्हारी चिंताओं का ख्याल !
बस,
सभी हँसेंगे
तुम्हारी बेबसी पर,
नमक छिड़केंगे
तुम्हारी दुखती रगों पर
सब कानाफूसी करेंगे
तुम्हारी समस्या पर
और तुम
सुपर मैन से
बन जाओगे
एक समस्या मैन,
मगरमच्छ आँसू बहाते
लोगों की तथाकथित स्नेहिल नजरों में,
अस्तु,
उठो!सजग हो !!
छोड़ो व्यर्थ का संताप
फिर उड़ान शुरू करो,
यदि कोई संगी साथ भी न दे,
तो भी
आशा के दीप जलाओ।

Author
डा. सूर्यनारायण पाण्डेय
देश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में 1000 से अधिक लेख, कहानियां, व्यंग्य, कविताएं आदि प्रकाशित। 'कर्फ्यू में शहर' काव्य संग्रह मित्र प्रकाशन, कोलकाता के सहयोग से प्रकाशित। सामान्य ज्ञान दिग्दर्शन, दिल्ली : सम्पूर्ण अध्ययन, वेस्ट बंगाल : एट ए ग्लांस जैसी... Read more
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