आशा की लौ

आज नहीं तो कल निकलेगा
हर विपदा का हल निकलेगा
अँधियारे को तो छँटना ही है
जब पूरब में सूरज निकलेगा।

उठना गिरना, गिरकर उठना
जीवन की परिभाषा है
ले तिनका सागर वो तैरे
जीवन की जिसमे आशा है

विपदाएँ तो आएँगी,
ठोकर मार गिराएँगी
हर बारी तूँ उठते जाना
हर पारी तूँ जीत के जाना

मन में आस रहे करने की
सब कुछ संभव हो जाएगा
कोशिश पूरी कर प्यारे
तूँ जो चाहेगा पाएगा

जीना मरना सब उसकी मर्जी
फिर क्यों तूँ हार से हारे रे।
अटल नहीं कोई हार है प्यारे
मन तेरा बस हार न जाए रे।
– 🖋️अटल©

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